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टाटा मोटर्स शुरू करेगी भारत में सेमीकंडक्टर बनाना: सस्ती होंगी इलेक्ट्रिक कारें

टाटा मोटर्स के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखर ने बताया की टाटा भारत में सेमीकंडकटर बनाने का काम शुरू करने वाली है।  जिससे टाटा मोटर्स की इलेक्ट्रिक कारें और भी सस्ते दामों में मिलेगी।  

टाटा संस ग्रुप:-  टाटा भारत में सुई से लेकर बड़े-बड़े व्हीकल बनाने तक का सारा काम करती है। टाटा मोटर्स भारत में व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग का काम करती है और अभी भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट की टाटा सबसे बड़ी कंपनी है। टाटा अब तक भारत में 3 इलेक्ट्रिक कार लॉन्च कर चुकी है, दो इलेक्ट्रिक कारों को शोकेस कर चुकी है और इसके अलावा एक से दो और इलेक्ट्रिक कारों पर काम कर रही है जो जल्द ही भारत में आ सकती है।  ऐसे में कहा जा सकता है की इलेक्ट्रिक व्हीकल्स सेगमेंट में टाटा अभी अपने आप से ही मुकाबला कर रही है।

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भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्किट अभी इतनी तेज़ी नहीं पकड़ रहा है जितना तेज़ी से इसे बढ़ना चाइये इसके पीछे एक बड़ा कारण है भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ज्यादा कीमत।  आज भी लोगो को इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमते उन्हें इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने से रोक रही है।  इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कम्पनियाँ लगातार इस पर काम भी कर रही है।  

टाटा बनाएगी सेमीकंडक्टर:- 

टाटा मोटर्स अब इस क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रही है।  हाल ही में एक इंटरव्यू में कंपनी के चेयरमैन N. चंद्रशेखर ने इस बात की जानकारी दी की टाटा अब भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए सेमीकंडक्टर चीप बनाने का काम शुरू करने की योजना बना रही है। 

भारत विश्व में सप्लाई करेगा सेमीकंडक्टर चीप:- 

चंद्रशेखर ने बताया की भारत अगले कुछ ही वर्षो में सेमीकंडक्टर चीप का निर्माण शुरू कर देगा। ये भारत को विश्वस्तर पर आत्मनिर्भरता प्रदान करेगा। आने वाले कुछ वर्षो में भारत दुनिया के लिए सेमीकंडक्टर चीप के मामले में एक बड़ा आपुर्तिदाता बन सकता है। इससे भारत को वैश्विक स्तर पर बड़े फायदे हो सकते है।  

नमक-टू-ऑटो-टू-स्टील:- 

टाटा ने अपने सफर को नमक से शुरू करके ऑटो मार्केट और फिर स्टील मार्केट तक बढ़ाया है। चंद्रशेखर से जब कोविड काल के बाद के बदलावों और कमियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया की “टाटा जिसे नमक-टू-ऑटो-टू-स्टील समूह कहा जाता था अब वो अंतत: एक अपस्ट्रीम चीप फेब्रिकेशन प्लेटफार्म लॉन्च करने की योजना बना रहा है। टाटा ने पहले ही टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की स्थापना कर ली है , जहा पर सेमीकंडक्टर के निर्माण और असेंबली परीक्षण का काम किया जायेगा।  इस योजना ने कुछ देश भी अपनी भागीदारी निभाने वाले है उनमे अमेरिका, जापान, ताइवान और दक्षिण कोरिया प्रमुख है।  

सेमीकंडक्टर निर्माण से फायदे:- 

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल के मार्किट को बढ़ने के लिए सेमीकंडक्टर निर्माण बनत फायदेमंद शाबित होने वाला है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की एक रिपोर्ट में हाल ही में कहा गया है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन के लिए बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत को अगले पांच वर्षों में लगभग 63,000 चार्जिंग स्टेशनों और 26,900 करोड़ रुपये के संचयी निवेश की आवश्यकता होगी।

इन बढ़ती इलेक्ट्रिक वेहिकल्स और चार्जिंग स्टेशन की मांग में सेमीकंडक्टर की भूमिका काफी अहम् हो जाती है।  

कम होंगे इलेक्ट्रिक गाड़ियों के दाम:- 

अगर टाटा भारत में ही सेमीकंडक्टर  चीप का निर्माण शुरू कर देती है तो इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।  अभी भारत में जितनी भी इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है वो अपनी गाड़ियों के लिए सेमीकंडक्टर को विदेशो से अस्सेम्ब्ले करती है उसकी बड़ी कीमत भी देनी पड़ती है , वही अगर इनका निर्माण भारत में शुरू हो जाये तो इलेक्ट्रिक गाड़ियों के दामों में भी कमी आ सकती है।  

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